प्राणायाम

                  प्राणायाम

श्वसन(श्वास लेने- छोड़ने की क्रिया) हमारे जीवन की सबसे आवश्यक क्रिया है| श्वास आना-जाना जीवित होने का प्रमाण है| श्वास का रुकना ही मौत है| इन्हीं श्वासों को जीवन शक्ति या प्राण कहते हैं|
           प्राण- शक्ति या श्वास अंदर लेने और बाहर छोड़ने की क्रिया पर नियंत्रण करना ही प्राणायाम कहलाता है| इसे वायु साधना भी कहा जाता है|

 प्राणायाम से लाभ-
    हमारे शरीर में जितनी भी क्रियाएं होती हैं, उन सभी का स्वास्थ्य से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से गहरा संबंध है| प्राणायाम के द्वारा सांसों के आवागमन पर नियंत्रण कर के हम अपने शरीर को निरोग व तरोताजा बनाए रख सकते हैं| गहरी श्वास न लेने के कारण हमारे फेफड़ों का तीन- चौथाई भाग निष्क्रिय रहता है| परिणामस्वरूप शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है एवं नुकसान पहुंचाने वाले द्रव्य जमने लगते हैं| इसके कारण टी.बी., खांसी जैसे रोग हो जाते हैं| प्राणायाम के द्वारा फेफड़े मजबूत होते हैं और रक्त संचार तेज हो जाता है| प्राणायाम के और भी कई लाभ हैं-
(1)  प्राणायाम करने से मस्तिष्क का तनाव कम होता है| मन एकाग्र चित्त होता है|
(2)  प्राणायाम करने से शरीर निरोग रहता है|
(3)  नियमित प्राणायाम करने से पाचन शक्ति और स्मरण शक्ति बढ़ती है|
(4) प्राणायाम से दीर्घस्वसन का अभ्यास स्वतः होने लगता है तथा इससे हमारी आयु बढ़ती है|
(5)  प्राणायाम करने से क्रोध, चिंता, निराशा और भय जैसे विकार दूर होते हैं|
(6) सूझ-बूझ, दूरदर्शिता, सूक्ष्म निरीक्षण, आत्मविश्वास जैसे गुणों का विकास होता है|
(7) नियमित प्राणायाम करके मोटापा, कब्ज,रक्तचाप, गैस और स्वास्थ संबंधी असाध्य रोगों से बचा जा सकता है|

प्राणायाम की क्रियाएं-
प्राणायाम में स्वास्थ्य से संबंधित अनेक क्रियाएं की जाती है| निम्नलिखित 5 क्रियाओं को ध्यान से समझें जिन को करने में 10 से 15 मिनट का समय लगता है-
(1) भस्त्रिका प्राणायाम
(2) कपालभाति प्राणायाम
(3) अनुलोम- विलोम 
(4) भ्रामरी प्राणायाम 
(5) उद्गीथ प्राणायाम


(1) भस्त्रिका प्राणायाम-
(समय 3-5 मिनट)
नियम -
(1) पद्मासन में बैठ जाए|
(2) दोनों नासिकाओं  से श्वास को अंदर खींचे|
(3) स्वास को बिना अंदर रोके पूरी ताकत से बाहर निकाले|
लाभ-
(1) सर्दी, जुकाम, दमा, नजला और श्वास  संबंधी रोग दूर होते हैं|
(2) रक्त शुद्ध होता है तथा शरीर के विषाक्त द्रव्यों का निष्कासन होता है|

 सावधानियां-
(1) श्वास को अंदर खींचते समय पेट ना भूले बल्कि पसलियों तक सीना ही फूले|
(2) गर्मी के दिनों में अधिक ना करें|
(3) शुरुआत मंद गति से करें क्रमशः गति बढ़ाते हुए तीव्र गति से करें|


(2) कपालभाति प्राणायाम-
(समय 3-5 मिनट)
नियम -
(1) ध्यान के किसी भी आसन में बैठ जाएं|
(2) श्वास को सामान्य तरीके से अंदर आने दे|
(3) सामान्य अवधि तक श्वास  को भीतर रहने दें|
(4) जोर से श्वास को बाहर निकालने के दौरान पेट को अंदर करें|
लाभ -
(1) ह्रदय, फेफड़े और मस्तिष्क तथा कफ संबंधी रोग नहीं होते|
(2) कब्ज जैसी बीमारी इसके नियमित करने से दूर हो जाती है|
(3) मुख  मंडल का तेज एवं सौंदर्य बढ़ जाता है|
(4) मन सदैव प्रसन्न रहता है तथा नकारात्मक विचार नष्ट हो जाते हैं|

सावधानियां -
(1) शुरुआत में एक-दो मिनट करते हुए आराम करें 1- 2 माह के अभ्यास के बाद 5 मिनट तक करें|
(2) श्वास को अंदर भरने के लिए प्रयत्न करें|
(3) पूरी एकाग्रता श्वास  छोड़ने में लगाएं|

(3) अनुलोम-विलोम प्राणायाम-
(समय 10 मिनट)
नियम -
(1) पद्मासन में बैठ जाएं
(2) दाएं हाथ के अंगूठे से दाईं नासिका को बंद करें|
(3) बायीं नासिका से श्वास धीरे धीरे अंदर आने दे|
(4) स्वास पूरा अंदर भरने पर अनामिका व मध्यमा उंगलियों से बाएं नासिका को बंद करें|
(5) दाईं नासिका के अंगूठे को उठा ले बायीं  नासिका से श्वास को धीरे-धीरे बाहर निकलने दे|
(6) यही क्रिया लगातार दोहराएं|
लाभ -
(1) नाडियां सामान्य स्थिति में कार्य करती हैं, जिससे रक्त संचार अच्छा बना रहता है|
(2) सर्दी, जुकाम, खांसी, पित्त- कफ संबंधी रोग, अस्थमा आदि दूर होते हैं|
(3) आनंद व उत्साह की वृद्धि होती है|

सावधानियां -
(1) गर्मी के मौसम में 3 से 5 मिनट अनुलोम-विलोम करना ही पर्याप्त है|
(2) शुरुआत में 1 से 2 मिनट करने पर थकान महसूस होगी बीच-बीच में आराम करते हुए प्राणायाम की अवधि को 10 मिनट तक बढ़ाएं|
(3) हथेली को नाक की सीध में ना रख कर उसके ऊपर रखें|


(4) भ्रामरी प्राणायाम-
(कम से कम 3 बार अधिक से अधिक 21 बार)
नियम -
(1) सिद्धासन में बैठ जाएं एवं स्वास्थ को पूरी तरह अंदर भरें|
(2) अपने दोनों हाथों के अंगूठे से दोनों कानों को बंद कर ले अब दोनों हाथों की तर्जनी को माथे पर मध्यमा अनामिका और कनिष्का उंगली को आंखों के ऊपर रखना|
(3) मुंह बिल्कुल बंद रखें तथा भंवरे की तरह गुंजन करते हुए नाक से स्वास को बाहर छोड़ें श्वास को बाहर छोड़ते समय ओम का उच्चारण करें|
लाभ -
(1) मानसिक तनाव और उच्च रक्तचाप तथा हृदय रोग दूर हो जातेे हैं एवं मन स्थिर व प्रसन्न रहता है|
सावधानियां-
(1) नासिक के मूल को अधिक बल देकर ना दबाए दोनों हथेलियां कान की सीध में रहे|
(2) श्वास को बाहर छोड़ते समय मुंह बंद रखें|

(5) उद्गीथ प्राणायाम-
(3-7मिनट )
नियम -
(1) पद्मासन में बैठ जाएं|
(2) धीरे-धीरे सांस को अंदर खींचे सांस अंदर खींचते समय अपने मन को सांस पर केंद्रित रखें|
(3) ओम का उच्चारण करते हुए धीरे-धीरे सांस को बाहर निकाले|
(4) यह क्रिया बार-बार करें|
लाभ -
(1) मन एकाग्र होता है|
(2) इस प्राणायाम के द्वारा सांसो की गति पर नियंत्रण किया जाता है|

सावधानियां -
(1) प्रारंभ में धीरे-धीरे करते हुए सांस लेने और छोड़ने के समय को 1 मिनट तक ले जाएं|

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प्राणायाम करने के सामान्य नियम-
(1) प्राणायाम स्वच्छ एवं खुली जगह पर करें|
(2) प्राणायाम यथासंभव स्नान करने के बाद करिए|
(3) प्राणायाम के लिए पद्मासन में बैठना ठीक होता है| यदि इन आसनों में बैठने में कष्ट हो तो सुखासन में बैठकर प्राणायाम करें|
(4) बैठने के लिए दरी या कंबल का उपयोग करें|
(5) सांस सदैव नासिका से ही ले, मुंह से कदापि सांस न ले|
(6) भोजन करने के तुरंत बाद प्राणायाम कभी भी नहीं करना चाहिए| भोजन के 4 से 5 घंटे बाद ही प्राणायाम करना ठीक होता है|
(7) प्राणायाम के पहले दोनों नासिका को अच्छी तरह साफ कर लें|
(8) प्राणायाम करते समय सांस को हठपूर्वक ना रोके|
(9) प्राणायाम के समय मेरुदंड, गर्दन और कमर को बिल्कुल सीधा रखकर बैठे|
(10) यदि थकान महसूस हो तो प्राणायाम की क्रिया करने के बाद थोड़ी देर आराम करें फिर दूसरी क्रिया करें|
(11) प्राणायाम करते समय किसी जानकार से सलाह अवश्य लें|

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