तुलसी के फायदे

            तुलसी के फायदे

हमारी पृथ्वी हजारों लाखों औषधि गुणों वाले पौधों से भरी पड़ी है |जिसका उपयोग हम अनेक रोगों में करते रहते हैं| ऐसे ही एक अत्यंत गुणकारी औषधीय पौधे का नाम है -"तुलसी"
           तुलसी का पौधा अत्यंत औषधीय गुणों से भरा पड़ा है| तुलसी के पौधे का प्रत्येक भाग जैसे पत्तियां, बीज ,जड़, शाखाएं आदि किसी न किसी रूप में उपयोग किया जाता है|
           हिंदू धर्म के अनुसार तुलसी के पौधे पर विभिन्न देवी देवताओं का वास होता है| अतः हिंदू धर्म में तो तुलसी के पौधे की पूजा की जाती है, और इसे हर घर के आंगन में लगाया भी जाता है|

           तुलसी का पौधा भारतवर्ष के साथ-साथ पूरे विश्व में हर जगह पाया जाता है भारतवर्ष में इसकी कई प्रजातियां उपस्थित हैं तुलसी के पौधे का जीव वैज्ञानिक नाम Ocymum sanctum  होता है|
         तुलसी का पौधा हमारे लिए किस प्रकार लाभदायक होता है, और इसे किन किन रोगों में उपयोग किया जाता है |इसे जानने के लिए हमें निम्न बातों पर चर्चा करनी आवश्यक है |तुलसी के पौधे का उपयोग निम्न प्रकार है-

(1) बैक्टीरिया से लड़ने में-
तुलसी के पौधे के अंदर एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं |जिसके कारण यह बैक्टीरिया से लड़ने में अत्यंत लाभकारी होता है| अतः यदि हमें किसी बैक्टीरिया द्वारा रोग हो जाए तो ऐसी स्थिति में हमें तुलसी के पत्तों या तुलसी के बीजों का सेवन करना चाहिए| जिसके कारण यह हमारे शरीर में मौजूद बैक्टीरिया से लड़कर उन्हें मार देता है, और हमें रोग मुक्त कर देता है|

(2) शरीर के घाव को जल्दी भरने में-
यदि हमारे शरीर पर किसी चोट के कारण घाव बन जाता है तो ऐसी स्थिति में तुलसी का सेवन करने से शरीर के घाव जल्दी भर जाते हैं|

(3) मधुमेह के रोग में-
मधुमेह अर्थात शुगर के रोगियों के लिए तुलसी का पौधा एक वरदान होता है |मधुमेह के रोगियों को तुलसी के पत्तों और तुलसी के बीजों का लगातार सेवन करना चाहिए |इसके लगातार सेवन से मधुमेह के रोग में लाभ मिलता है|

(4) कोलेस्ट्रॉल को कम करने में-
कोलेस्ट्रोल हमारे शरीर के लिए अत्यंत हानिकारक होता है| कोलेस्ट्रोल की LDL  वैरायटी हमारे शरीर के लिए अत्यंत हानिकारक होता है |परंतु तुलसी के सेवन से यह हानिकारक कोलेस्ट्रॉल हमारे शरीर में जमा नहीं हो पाता है |जिसके कारण हमारे शरीर को हानिकारक कोलेस्ट्रॉल से बचने में लाभ होता है|

(5) एसिडिटी के रोग में-
हमारे आमाशय में भोजन को पचाने के लिए हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का स्रावण होता रहता है| परंतु जब यह हाइड्रोक्लोरिक अम्ल हमारे शरीर में अधिक मात्रा में निकलने लगता है तो इसके कारण हमें एसिडिटी का सामना करना पड़ता है| जिस कारण हमारे पेट व सीने में जलन का अनुभव होता रहता है |ऐसी स्थिति में हमें तुलसी के पत्तों का चाय बना कर या तुलसी के पत्तों को पानी में उबालकर उसे पीने से एसिडिटी के रोग में लाभ मिलता है|

(6) पेट के अल्सर में-
हमारे आमाशय में यदि हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का अधिक स्रावण लगातार होता रहता है, तो इसके कारण हमारे आमाशय की दीवारों पर घाव बन जाता है| इसे ही अल्सर कहा जाता है |यह अत्यंत ही हानिकारक व पीड़ा दाई होता है| अतः पेट के अल्सर से बचने के लिए हमें तुलसी के पत्तों व तुलसी के बीजों का सेवन करना चाहिए|

(7) जोड़ों के दर्द में-
हमें जोड़ों के दर्द से बचने के लिए तुलसी के पत्तों व  तुलसी के बीजों का सेवन करना चाहिए| इसके लगातार सेवन से जोड़ों के दर्द में लाभ मिलता है|

(8) सर्दी जुकाम में-
यदि हमें कभी सर्दी जुकाम का सामना करना पड़े तो ऐसी स्थिति में हमें तुलसी के पत्तों को चाय के रूप में या तुलसी के पत्तों व बीजों को काढ़े  के रूप में प्रयोग करना चाहिए |ऐसा करने से सर्दी जुकाम में हमें तुरंत लाभ मिलता है|

(9) गले की खराश में-
गले की खराश के लिए तुलसी के पत्तों का सेवन अत्यंत लाभकारी होता है |तुलसी के पत्तों को यदि हम चबाकर खा लेते हैं या चाय में पी लेते हैं तो इससे गले की खराश में तुरंत लाभ मिलता है|




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